
कभी आपने बचपन में अपनी आंखों में एक छोटा सा स्पॉट नोटिस किया या फिर आप यूं ही अपनी आंखों का चेकअप करवाने गए और चेकअप के दौरान आपको पता चला हो कि आपको आई फ्रेकल है। आंखों में झाई होना सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में बेहद आम बात है और इससे आपकी आंखों को किसी तरह की हानि नहीं होती। हालांकि बहुत ही कम मामलों में यह एक प्रकार के कैंसर में बदल सकते हैं जिसे मेलेनोमा कहा जाता है। इसलिए चाहे आई फ्रेकल्स पुराने हों या नए, उनकी जांच जरूर करवानी चाहिए। तो चलिए आज हम आपको आई फ्रेकल्स के बारे में विस्तार से बताते हैं
आई फ्रेकल्स आंखों में मौजूद स्पाॅट को कहा जाता है। कई बार यह आपको नजर आ भी सकता है और नहीं भी। यह आपकी आई बाॅल से लेकर बाहरी हिस्से पर कहीं भी हो सकता है। आमतौर पर आई फ्रैकल्स दो प्रकार का होता है- इनमें से एक को तकनीकी रूप से नेवस कहा जाता है। नेवस का अर्थ ही होता है तिल। इन्हें स्पॉट करना काफी आसान है। वहीं अन्य आई फ्रैकल्स आपकी आंखों के पीछे छिपे होते हैं और इसे एक आई स्पेशलिस्ट ही देख पाता है और इसलिए इन फ्रैकल्स के बारे में आंखों की जांच करवाने पर ही पता चलता है। चूंकि यह आंखों के अलग-अलग हिस्से पर होते हैं तो उसी के अनुरूप इनके नाम भी हैं-
आई फ्रैकल्स कई कारणों से हो सकता है। हो सकता है कि जन्म से ही आपको आई फ्रैकल हों या फिर जन्म के बाद भी जैसे-जैसे आप बढ़ते हैं, यह भी विकसित हो सकता है। स्किन पर होने वाली झाईयों की ही तरह आई फ्रैकल्स भी मेलानोसाइट्स के कारण होते हैं। इसके अतिरिक्त सूरज की किरणें भी नेवस को बढ़ा सकती हैं। आईरिस नेवस भी धूप के कारण बढ़ सकते हैं। 2017 में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने अधिक समय धूप में बिताया, उनमें आईरिस फ्रैक्ल्स अधिक थे।
कंजंक्टिवल नेवी अक्सर आखों के सफेद भाग पर साफतौर पर दिखाई देते हैं। इसका अन्य कोई लक्षण नजर नहीं आता। यह स्थिर बने रहते हैं, लेकिन समय के साथ बढ़ती उम्र में या गर्भावस्था के दौरान इनका रंग बदल सकता है।
आईरिस नेवी आमतौर पर आंखों को चेक करते समय ही सामने आते हैं। वे आमतौर पर नीली आंखों वाले लोगों में होते हैं और इन व्यक्तियों में अधिक आसानी से देखे जाते हैं।कोरोइडल नेवी होने पर कोई लक्षण नजर नहीं आते, हालांकि यह तरल पदार्थ का रिसाव कर सकते हैं।




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