
पब्लिकयूवाच - रायपुर। लॉक डाउन से पहले दो दिनों में व्यापारियों ने जमकर नोट छापे। बाजार में न तो सोशल डिस्टेंस का पालन हुआ और न ही मास्क लगाने का पालन किया है। दो दिनों तक बाजार में रेलम-पेल भीड़ उमड़ते रहा और कोरोना को एक घर से दूसरे घर भेजने के संवाहक बनते रहे। वहीं सब्जी और किराना व्यापारियों ने खुलकर लूटमार मचाई। जैसे सरकार ने उन्हें लूट का लाइसेंस जारी कर दिया हो। एक जाता अनुमान के अनुसार राजधानी में निम्न आयवर्ग के 35 हजार परिवार है जिनकी सब्जा खरीदने की क्रय क्षमता 5 सौ रुपए है। 5 सौ गुना 35 करें तो आंकड़ा 1,75 करोड़के आसपास पहुंच जाता है। जबकि पॉश कालोनी, बंगलों वालों धनाढ्यों की क्षमता असिमित है। वे 5-10 हजार तक की खरीदी करने में सक्षम है। इस मान से बाजार में दिवाली से पहले ही लॉकडाउन ने कारोबारियों की दिवाली मनवा दी है। बाजार में पिछले दो दिनों से ब्रेड और अंडा गायब है। 120 रुपए दर्जन में भी खरीददार खड़े है पर माल नहीं है। खाद्य सामगरी और सब्जियों के दाम में जो आग लगी है वैसा तो पिछले दस -बीस सालों में सब्जियों और किराना सामानों को दाम में तेजी नहीं आई है। इस कोरोना गरीबों को दोहरा जंग लडऩे के लिए मजबूर कर दिया है। कोरोना बचने घर में रहने के लिए सात दिन की खाद्य सामग्री इकट्ठा करने में लोगों को बाजार में 12 गंटे लग गए फिर पूरा सामान नहीं मिला। अब सात दिनों के लिए जो सब्जी और राशन खरीदा है उससे ही सात दिन चलाना है। रविवार और सोमवार को तो बाजार में धनतेरस जैसा माहौल दिकाई दे रहा था, हर दुकान में भीड़, मुंहमांगे दाम पर उपभोक्ता खरीदी कर रहे थे. इतना पैसा बाजार में आया कहां से जो करोड़ों के खरीद फरोख्त लोग सात दिन जीने के लिए खरीदी करने निकल पड़े। इतना तो साल भर का राशन भरने में खर्च नहीं किया जाता। अचानक लॉकडाउन लगने की घोषणा ने नागरिकों को इस कदर डरा दिया कि वे सात दिनों की जगह महीने भर का राशन और सब्जी खरीदते देके गए।
सात दिनों के लॉकडाउन में सब्जियों की बिक्री में जबरदस्त तेजी आईहै कारोबारी दो दिन में मालामाल विकली का सुख भोगते नजर आए। कीमतें काफी अधिक होने के बाद भी लोगों ने जमकर खरीदारी की। कारोबारियों के अनुसार, राजधानी में रोजाना करीब 10 लाख रुपये की सब्जियों की बिक्री होती है। मगर, लॉकडाउन की घोषणा के बाद इन दो दिनों यानि रविवार और सोमवार को सब्जियों की जबरदस्त बिक्री हुई। बताया जा रहा है कि करीब 2.5 करोड़ की सब्जियां बिक गई हैं। इस प्रकार अगर रोजाना होने वाली बिक्री को देखा जाए, तो इन दो दिनों में 25 फीसद ज्यादा सब्जियों की बिक्री हुई है।
लॉकडाउन से पहले खरीदी, जमकर हुई मुनाफाखोरी
लॉकडाउन भले ही एक हफ्ते का है, लेकिन सोमवार को पूरे शहर के लोग बाजारों में उमड़ गए और एक-दो महीने तक का सामान स्टॉक कर लिया। सब्जी बाजार, किराना दुकान और डिपार्टमेंटल स्टोर के अलावा जरूरी चीजों की दुकानों पर लोग टूट पड़े। आलू-प्याज तो ऐसा बिका कि 4 बजे के बाद बाजार से गायब हो गया। इनकी थोक दुकानें तक बंद कर दी गईं। सब्जियां में आग लगी रही,डिपार्टमेंटल स्टोर्स में लंबी लाइन रही, बेकरियों में भी लोगों को सामान खरीदने के लिए एक-एक घंटा इंतजार करना पड़ गया। इस बीच, रुक-रुककर बारिश होती रही, लेकिन इससे न भीड़ रुकी और न ही जाम पर कोई असर पड़ा। राजधानी के सभी बाजारों में फिजिकल डिस्टेंसिंग और मास्क के नियम धराशायी हो गए। गोलबाजार, शास्त्रीबाजार, मालवीय रोड, एमजी रोड, रहमानिया चौक, हलवाई लेन, शारदा चौक, पंडरी, तात्यापारा, स्टेशन रोड, फाफाडीह, आमापारा, टिकरापारा, तेलीबांधा, कुशालपुर समेत सभी बाजारों में लोग सुबह से शाम तक खरीदी करते रहे।
करोड़ों के राशन सामग्री का उठाव
सब्जियों की ही तरह सुपर बाजार और किराना दुकानों पर जमकर लोगों की भीड़ उमड़ी। बताया जा रहा है कि हफ्ते भर पहले होने वाली बिक्री की तुलना में इन दो दिनों में बिक्री 50 फीसद बढ़ गई। राजधानी में रोजाना राशन के सामान की बिक्री 15 लाख रुपये मानी जाए, तो कोरोना के भय की वजह से यह बिक्री भी करीब 40 फीसद घट गई थी। हफ्ते भर पहले रोजाना की बिक्री केवल नौ लाख रुपये की हो रही थी। मगर, इन दो दिनों में रोजाना होने वाली बिक्री में पचास फीसद की बढ़ोतरी हुई और बिक्री करीब 40 लाख रुपये की हुई।
आलू-प्याज की मारामारी
आलू-प्याज में लोगों की ज्यादा मारामारी देखने को मिली। स्टॉक होने के बावजूद विक्रेताओं ने कालाबाजारी की और महंगे दामों में इन्हें बेचा। प्रशासन ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी वजह से आलू-प्याज दोनों ही 45 से 50 रुपये किलो तक बिके।




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