
छत्तीसगढ़ में अल्पवर्षा के कारण अकाल की स्थिति बनती नजर आ रही है. आम लोगों से लेकर किसान भी बारिश नहीं होने से काफी परेशान हैं. तो वहीं राज्य की कांग्रेस सरकार को विपक्षी दल ने इस मुद्दे पर घेरना भी शुरू कर दिया है. मालूम हो कि प्रदेश के 12 जिले और 73 तहसीलों में अल्पवर्षा के कारण सूखे के हालात बनते नजर आ रहे है।
छत्तीसगढ़ सहित देशभर में अल्पवर्षा की स्थिति, गिरता भू-जल स्तर और पानी की बर्बादी भीषण जल संकट की ओर ईशारा कर रही है. मगर तमाम ईशारों के बावजूद धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. आलम ये है कि राज्य सरकार केवल कागजों में चुस्त दिखाई दे रही है, जबकि धरातल पर हकीकत ये है कि छत्तीसगढ़ में 21 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की आवश्कता तो है, लेकिन महज 12 लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई हो पाती है. मौजूदा हालात सूखे को लेकर ये है कि राज्य की 73 तहसीलों में सूखे के हालात बन गए है. अब अल्पवर्षा को लेकर किसान से लेकर राजनीतिक दलों ने भी अपनी चिंता दिखानी शुरु कर दी है।
किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेत किसानी का कार्य करने में परेशानी हो रही है. अब बारिश का इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं है. वहीं इस मामले में जेसीसी जे सुप्रीमो अजीत जोगी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सबसे बुरा अकाल मंडरा रहा है. उत्तरी हिस्से में बारिश नहीं हो रहा है. इस वजह से धान सूख रहा है. अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो सूबे के 2/3 इलाके में सूखे की स्थिति बन सकती है. तो वहीं बीजेपी प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अकाल की स्थिति बनी हुई है. किसान परेशान हैं. जिन जिलों में सूखे की आशंका है वहां के लिए सरकार ने कोई ठोस तैयारी और प्लानिंग नहीं की है।
कृषि वैज्ञानिक ने कही ये बात
प्रदेश में सूखे के हालात को लेकर कृषि वैज्ञानिक ने भी अपनी चिंता जताई है. कृषि वैज्ञानिक संकेत ठाकुर मानते हैं कि अभी राज्य में सूखे को लेकर गंभीर हालात है. राज्य सरकार को किसानों के हित में आपातकालीन कदम उठाने की तैयारी करनी चाहिए. तो वहीं सूबे के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे मानते हैं कि आने वाली सभी तकलीफों से निपटने की सारी तैयारी सरकार ने कर ली है।




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