
छत्तीसगढ़ में ऐसा मामला सामने आया है जिसमे दो बचपन की सहेलियों को ऐसा प्यार हुआ की दोनों ने अपने पति को छोड़कर खुद पति-पत्नी बनकर रहने लगी अचानक इन दोनों प्रेमियों के बीच कोई तीसरा आ गया। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि वो तीसरा इंसान भी एक लड़की ही थी। इस लव स्टोरी में अचानक आए इस ट्विस्ट ने तीनों की जिंदगी ही बदल दी । आइए जानते है इस समलैंगिग लव स्टोरी का अंजाम… ऐसे शुरू हुई इनकी लव स्टोरी दरअसल, 2 सहेलियां कामेश्वरी यादव उम्र 27 साल और प्यारी कौशल उम्र 35 वर्ष की दोस्ती बहुत ही गहरी थी। समय के साथ दोनों के शादी भी हो गई। लेकिन अचानक दोनों के संबंध ऐसे बने कि दोनों ने अपने अपने पति को छोड़ दिया। उसके बाद एक साथ घर लेकर साथ रहने लगीं।
पुलिस के अनुसार कामेश्वरी और प्यारी एक दुसरे के साथ पति-पत्नी की तरह रहते थे। इनमें प्यारी हमेशा मर्दाना कपड़ों में रहती थी। पति पत्नी के बीच आई वो… प्यारी का पड़ोस में रहने वाली गिरिजा यादव के घर आना-जाना था। धीरे-धीरे इनके रिश्ते गहराने लगे तो कामेश्वरी और प्यारी में झगड़ा होने लगा। तीन-चार दिन पहले भी इसी बात को लेकर दोनों में काफी विवाद हुआ। हत्या कर जला दी लाश रात करीब 12 बजे गिरिजा इनके घर पहुंची। तब कामेश्वरी और प्यारी कौशल सो रहे थे। सोते समय ही गिरिजा ने सिल पत्थर से कामेश्वरी पर वार कर दिया।
कामेश्वरी के माथे पर चोट आई। कामेश्वरी के साथ प्यारी की भी नींद खुल गई। दोनों ने गिरिजा को पकड़ लिया। प्यारी ने उसका गला दबा दिया। गिरिजा की हत्या करने के बाद दोनों ने उसपर केरोसीन डालकर आग लगा दी और जली हुई लाश बाड़ी में फेंक दी। लड़कियों के बीच प्रेमसंबंध हत्या के मामले में जो बात सामने आई, उसमें तीन लड़कियों के बीच प्रेमसंबंध का मामला निकला। जिसमें दोनों ने मिलकर एक को रास्ते से हटाने के लिए हत्या कर दी। खुलासा होने के बाद प्रकरण चर्चा का विषय बना था। प्रकरण की जाँच के दौरान प्यारी बाई कौशल (35) और कामेश्वरी यादव (28) को गिरजा की हत्या करने का दोषी पाया गया। दोनों ने पुलिस के समक्ष अपना अपराध कबूल कर लिया था।
आरोपियों की निशानदेही पर साक्ष्य भी बरामद कर लिया गया था। दोनों के खिलाफ धारा 302 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। मिली सजा कोर्ट ने दोनों पक्ष की सुनवाई पूर्ण होने के बाद भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 302 के तहत दोनों महिलाओं को दोषी पाया। इसके तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं 50 रुपए अर्थदंड भी लगाया गया। धारा 207 के तहत सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई एवं 50 रुपए अर्थदंड भी लगाया गया।




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