Thursday, 20 August 2026

 
पब्लिकयूवाच -  पिथौरा । महासमुंद जिले के पिथौरा के पिरदा सोसायटी में धान खरीदी में हुई बेतहासा अनियमितताओं को लेकर गुरुवार को दोबारा जांच की गई. कलेक्टर सुनील जैन के निर्देश पर एसडीएम बी एस मरकाम की उपस्थिति में तहसीलदार टी आर देवागन और पांच अन्य अधिकारियों की टीम द्वारा दोबारा जांच करने पर 5 हजार क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई. आश्चर्य की बात तो यह है कि हप्ते भर पहले इसी सोसायटी को जाँच अफसरों ने धान खरीदी मसले पर क्लीन चिट दे दिया था. पिरदा सोसायटी में धान खरीदी के लिए शासन से निर्धारित अन्य मापदण्डों का भी खुल्लम खुल्ला उल्लंघन किया गया. करीब सवा करोड़ से अधिक की घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश अधिकारियों द्वारा की गई।
पिथौरा से अफसरों की टीम ने इस चर्चित धान सोसायटी का जाँच करते वक्त यह भी देखा कि खरीदी के अन्य मानदण्डों का भी पालन नहीं किया गया है. पानी निकासी की उचित व्यवस्था (ड्रेनेज सिस्टम) का सर्वथा आभाव पाया गया. फीको का अनुपालन नहीं किया गया था. अमानक धान की खरीदी की गई है. दिलचस्प की बात यह है की प्रथम जाँच और द्वितीय जाँच की दरम्यानी अवधि में सोसायटी के कार्यकताओं ने साढ़े 13 हजार बारदानों की व्यवस्था कर उच्चधिकारियों के सहयोग से मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया।
शिकायतकर्ता जिला पंचायत अध्यक्ष उषा पटेल और कई निरीक्षणकर्ताओं ने इसकी शिकायत खाद्य मंत्री अमर जीत भगत से की थी. जिसके बाद इसे प्रशासन के संज्ञान में लाया गया. उनको बारदानों की भरती पर संदेह हुआ. उन्होंने जाँच अधिकारियों से बारदानों का तौल कराने की मांग की. उनकी मांग पर जब तौल कराया गया, तो सभी बोरों में धान कम पाया गया और करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आ सका. बारदानो में 20-25 किलो की भर्ती कर गिनती पूरी करने का प्रयास किया गया था. यह भी उल्लेखनीय है कि मामले पर परदा डालने की हर संभव कोशिश की गई. इस कोशिश में खरीदी किये गये क्वालिटीयुक्त धान के बोरों में खुले में पड़े सड़े-गले और अमानक धान को मिला कर बारदानों में पेकिंग की गई थी. जिससे चार करोड़ से अधिक की छति पहुँचाई गई है।
बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं की मांग पर पिरदा धान खरीदी सोसायटी में हुई अनिमितताओं के जाँच की मांग की थी. जिसकी जांच में गए तहसीलदार पिथौरा और उनकी टीम ने अपनी जाँच रिपोर्ट में क्लीन चिट दे दिया था. कलेक्टर ने दोबारा जाँच के आदेश दिए जिसके बाद करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ।

 
पब्लिकयूवाच - रायगढ़ । रायगढ़ जिले के लैलूंगा से नेटवर्किंग कार्य करने के लिए महाराष्ट्र गोंदिया से युवक पहुंचा अपने गांव जैसे ही लैलूंगा के बगुडेगा स्वास्थ केंद्र के कर्मचारी ने इसकी जानकारी तत्काल लैलूंगा बीएमओ को दी जिस पर पुलिस और डॉक्टरों की टीम मौके के लिए रवाना हो गई तब तक सरपंच और स्वस्थ्य कर्मी युवक और उसके पिता को हाईस्कूल में क्वारेटाईनन कर दिया गया था मौके पर पहुचे डॉक्टरों की टीम ने बारीकी से पूछताछ किया ।
जिसमें युवक महाराष्ट्र के गोंदिया में नेटवर्किंग का कार्य करने उसके दस दोस्तो के साथ गया था युवक डोंगरगढ़ तक पैदल आया उसके बाद ट्रक से राजनांदगांव होते हुए रायपुर पहुंचा और फिर पैदल सफर करते हुए लिफ्ट लेते हुये सभी युवक अपने घर पहुंचे जिसमें कुछ युवक धरमजयगढ़ सहित कापू,पत्थलगांव के बताए जा रहे है ये सभी युवक जिनके सम्पर्क आये है उन सभी का पता करने में पुलिस जुट गई है और डॉक्टरों द्वारा अपने स्तर पर सभी जगह सूचना दिया है।अभी फिलहाल युवक और उसके पिता को 28 दिनों तक क्वारेटाईनन मे रखा जाना है।

 
पब्लिकयूवाच- सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 953 मजदूर लॉकडाउन के कारण आंध्र प्रदेश में फंसे हुए है. इन मजदूरों के पास खाने के लाले पड़ गए हैं. खाना तो दूर रहने के लिए छत भी नहीं है. आंध्र सरकार अपने स्थानीय मजदूरों तक नगद के साथ-साथ राशन जरूर पहुंचा रही हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के मजदूरों को अपने हाल पर छोड़ दिया हैं. इन्हें किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया जा रहा है।
यहां फंसे मजदूर अपनी मजदूरी से जमा पैसों से ही खुद का पेट भर रहे हैं. मजदूरों का कहना है कि अब इनके पास दो-तीन दिनों तक ही पेट भरने के लिए पैसा हैं. जिसके बाद रोजी रोटी की संकट भी मंडराने वाला है. इस हालात में मजदूर आंध्र में फंसे हुए हैं कि उनके साथ में उनके छोटे-छोटे बच्चे और भारी भरकम मिर्ची कांवर भी हैं. जिसको लाद कर सैकड़ों किलोमीटर चल पाना मुश्किल हैं. उन्हें मजबूरन यही रुकना पड़ रहा हैं. आंध्र में फंसे मजदूरों को सड़क किनारे पेड़ के नीचे ही दिन-रात काट रहे हैं।
मजदूरों का कहना है कि आंध्र की ओर से पैदल जाने वालों मजदूरों के लिए कोई रोक टोक नहीं हैं, जो पैदल जाना चाहते वो जा सकते हैं. अब मजदूर पैदल निकलने की भी तैयारी कर रहे हैं. मजदूरों ने उनके छोटे-छोटे बच्चों को दिखाकर अपने-अपने घर पहुंचने वाहन की मांग की हैं. आंध्र में मिर्ची तुड़ाई करने गए मजदूरों में बाल श्रमिक भी है।
बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा और सुकमा जिले के 953 मजदूर आंध्र के नेल्लीपाका, नंदीगांम, तोटापल्ली, रायनपेंटा, गुंडाला, सोडारम, गन्नावरम और कासाराम में फंसे हुए हैं. जितने मजदूर यहां फंसे है वो आंध्र के ऐटापाका ब्लाक के ग्राम पंचायत नेल्लीपाका के आस पास के आठ ग्रामों की संख्या हैं. इसके अलावा अन्य ग्रामों में सैकड़ों की संख्या छत्तीसगढ़ के मजदूर फंसे हैं।
इस संबंध में कोंटा एसडीएम हिमांचल साहू ने कहा कि मजदूर सीमावर्ती राज्यों के अलावा पूरे देश के विभिन्न जगहों में फंसे हैं. देश में लॉकडाउन जारी हैं. फंसे मजदूरों की जानकारी कलेक्टर के संज्ञान में लाकर राज्य शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 
 
 पब्लिकयूवाच-सूरजपुर । सुरजपुर क्लेक्टर एसपी ओवर कॉन्फिडेंस ने जिले को किया कोरेना संक्रमित, सूरजपुर जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कुल 10 हो गई है जिसमें से आम नागरिक हैं पॉजिटिव पुलिस कॉस्टेबल है। सभी संक्रमित प्रतापपुर के जजावर ग्राम पंचायत के राहत शिविर में ठहरे हुए लोगों की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जो ठहरे हुए थे हुए थे उनसे कुटीर उद्योग की बांस से कारीकर का काम कराया जा रहा था। सवाल उठता है सामानों को उन्होंने छुआ था उससे था उससे भी संक्रमण अन्य व्यक्ति जो बाहर के थे उनको भी ना हो गया हो।  इसके साथ ही संक्रमित पुलिस कांस्टेबल अपने परिजन व अपने साथी अन्य पुलिसकर्मियों, अधिकारियों को संक्रमित कर सकता है  या कहे कि किया होगा।
साथ ही सूरजपुर जिले के क्लेक्टर अपनी पॉजिटिव स्टोरी छपवाने में इतना व्यस्त है कि जिले के स्वास्थ्य महकमा चरमाई हुई है। जिले में सुरक्षा लेकर किसी तरह से कोई कार्य करते हुए दिखाई नहीं दे रहा है। यहां तक कि सूरजपुर के सीमावर्ती क्षेत्र तारा कोरबा बॉर्डर से सटे हुए प्रेमनगर बलदेव नगर, विंधानचल में लोगो का आना जाना लगा हुआ है।
जिले में लोक डाउन में सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों और मीडिया की सुर्खियों में ही है। जमीन पर ऐसा कुछ हमें दिखाई नहीं पड़ रहा है। इसके साथ ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को खाद्य सामग्री समेत अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है कई ग्रामीण को प्रतिदिन भूखे ही सोना तक पड़ रहा है।
इसके साथ ही सूरजपुर जिला में करोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद भी जिला प्रशासन लगातार छुपाती रही इसका खुलासा तब हुआ जब बिलासपुर के आईजी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके पुष्टि की इसके साथ ही मीडिया कर्मियों ने सूरजपुर के डीएम को लगातार फोन लगाने की कोसिस की गई। जिला चिकित्सा अधिकारी को फोन लगाने की कोशिश करते रहे किंतु मीडिया से दूर भागते हुए कुछ जवाब नहीं दिया। केवल रायपुर के मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों को ही जवाब देते रहे स्वास्थ्य अवस्था की हालत विकासखंड प्रेमनगर के अंतर्गत 108 वाहन उपलब्ध नही है। इससे अंदाज लगा सकते है। 
सूरजपुर जिले के सुरक्षा व्यवस्था इसी से अंदाजा लगा सकते हैं 28 अप्रैल को सुबह करीब 11:00 बजे 5 पांच ग्रामीण रायपुर राजधानी से पैदल चलकर झारखंड राज्य के किसी जिले में जा रहे थे।
जिनसे हमने बात की तो बताया कि हम पिछले 6 दिनों से पैदल चलकर रायपुर से सूरजपुर में पहुंचे हैं जो सूरजपुर के बस स्टैंड यात्री प्रतीक्षालय में ठहरे हुए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है कोई भी कहीं से भी आ रहा है जा रहा है किसी को सुध लेने का समय नही है।
R.O.NO. 13259/132
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