Thursday, 13 August 2026

कवर्धा । तेंदुए की खाल की तस्करी कर बेचने की फिराक में घूम रहे तीन युवक पुलिस की गिऱफ्त में पहुंच गए हैं. मामला कवर्धा जिले के ग्राम टेलीटोला का है. मिली जानकारी के मुताबिक तीनों तस्कर तेंदुए की खाल को 10 लाख रुपए में बेचने के फिराक में घूम रहे थे. मुखबिर की सूचना पर लोहारा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खाल के साथ गिऱफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपी कबीरधाम जिले के रेंगाखर थाना के रहने वाले है ।

कवर्धा । जिले में एक आरक्षक पर नाबालिग लड़की से बलात्कार का आरोप लगा है. पीड़ित लड़की ने इस मामले की शिकायत थाने में की है. शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. सूत्र बतातें है कि मामला दर्ज होने से पहले ही आरोपी आरक्षक फरार हो गया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. फरार आरोपी के तलाशी की भी बात पुलिस कह रही है।
घटना कोतवलाली इलाके की बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि आरोपी आरक्षक का नाम अमित गौतम है और कोतवाली थाने में ही ये आरक्षक पदस्थ था. बताया जा रहा है कि नाबालिग लड़की के पिता भी पुलिस लाइन में पदस्थ है. नाबालिग लड़की और आरोपी आरक्षक में प्रेम प्रसंग था. दोनों एक ही इलाके में रहते भी थे. लेकिन कुछ बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया. वहीं शुक्रवार शाम नाबालिग लड़की ने कोतवाली थाने में आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कराया. आरक्षक पर अनाचार करने का आरोप लगाया गया है. सूत्रों के मुताबिक आरक्षक पहले से ही शादीशुदा है. मामला दर्ज होने के करीब 15 घंटे पहले से ही वो फरार हो गया है. इस पूरे मामले में डीएसपी जीएस कामडे ने कहा है कि नाबालिग लड़की ने एक आरक्षक के खिलाफ शिकायत की है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रही है।

 
 
 
 
 
पत्थलगांव– बागबहार थाना क्षेत्र के कुकूरभुका गांव में रहने वाले पति-पत्नी की लाश समीप के जंगल में मिली है. इस घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है ।  
मिली जानकारी के मुताबिक कुलतिला बाई आज सुबह जंगल बकरी चराने गई थी. साथ में उसका पति साधुराम चौहान भी गया था. अचानक खबर आई की दोनों की लाश जंगल में पड़ी है. पत्नी के सिर पर गंभीर चोट के निशान है ।  
वहीं साधुराम की लाश पेड़ पर लटकी मिली. मामला बेहद गंभीर लग रहा है. सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम जांच शुरू कर दी है. बताया जाता है कि पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था. पुलिस इस मामले को घरेलू विवाद से भी जोड़कर देख रही है. बहरहाल जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी ।  

 
 
 
 
 
जगदलपुर । बीजापुर के मोदकपाल में फैले जंगल में हाल ही में एक ममी पाई गई है। बाताया जा रहा है कि, ये कुदरत का करिश्मे से बनी हुई ममी है। इससे पहले भी एक दशक पहले ऐसा ही शव देखा गया था जो तांबे के रंग का था। जो कि, बाढ़ के साथ बहकर आया था।
इस ममी व अन्य सभ्यताओं के ममी में मोटा फर्क यह है कि इसे संरक्षित रखने किसी रसायन का उपयोग नहीं हुआ है। बल्कि कुदरत के करिश्मे ने एक शव को ममी में बदल दिया है।
पुलिस भी रह गई दंग : शव की स्थिति को देखते थाना ने इसकी जानकारी रीजनल फारेंसिक साइंस लेबोरेटरी को दी। यहां पहुंची टीम को आरंभिक जांच में चौंकाने वाली बात नजर आई कि यह शव ममी में परिवर्तित हो गया है।
शव को ससम्मान दफनाया गया : फॉरेन्सिक टीम द्वारा जांच पूरी हो जाने के बाद शव को पंचनामा कर इस शव को सम्मान सहित दफना दिया गया। शिनाख्ती व अन्य पहलुओं की जांच के लिए डीएनए सैपलिंग करने शव के एक हिस्से को रायपुर स्थित एफसीएल में भेजा गया है।
नहीं सड़ा था और शवों की तरह ये शव : ऐसा हुआ खुलासा सूखे नाले पर मिला यह शव पुराना होने के बाद भी अन्य शव की तरह सड़ा- गला नहीं था। बल्कि इसकी त्वचा मोटे चमड़े में बदल गई थी।
ममी मानकर दर्ज कर दिया रिकार्ड : करीब 6 फुट लंबाई वाले मृतक की उम्र 40 साल के आसपास आंकी गई। लक्षण के आधार पर इस शव को ममी मानकर रिकार्ड दर्ज किया गया है।
दशक भर पहले भी मिला है एक ममी : आरएफएसएल के वैज्ञानिक डा. बी सूरी बाबू ने एक अन्य वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि बारसूर इलाके में दशक भर पहले एक और ममी देखी गई थी।
बाढ़ के दौरान बहकर आया था शव : नदी के बीचों बीच एक अजीबो गरीब शव अटका हुआ है। इंद्रावती की छिछली धारा को पार कर जब वे उस जगह तक पहुंचे तो पाया कि यहां तांबई रंग का एक शव अटका हुआ था। शोध करने पर पता चला कि यह शव बाढ़ के दौरान दूर कहीं से बहकर आया होगा। इस टापूनुमा जगह पर रेत की तपिश व शुष्क हवाओं ने कालांतर में इसे ममी में बदल दिया।
कुदरत ने बना दिया ममी
ज्वाइंट डायरेक्टर, क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के डा. बी सूरी बाबू ने बताया कि, तेज गर्मी व सूखी हवाओं की वजह से ऐसा हुआ है। गर्मी ने शव को सूखा दिया व तेज हवा ने उसके सडऩ की प्रक्रिया धीमी कर दी। शव कड़े चमड़े की तरह हो गया था। इसे ममीटाइजेशन कहते हैं।
दो दशक में दो घटनाएं
ममी में बदलने की ऐसी घटनाएं कम देखी गई हैं। बस्तर संभाग में दो दशक में ये दो घटनाएं विभाग ने दर्ज की है। आगे और शोध जारी है।
R.O.NO. 13259/132
  • R.O.NO.13129/146 "
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