Thursday, 13 August 2026

 
 
छत्तीसगढ़ भवन नई दिल्ली में 15 से 20 मई तक चलने वाले, छत्तीसगढ़ के एरोमेटिक चावल मेले में आगंतुकों ने तीसरे दिन भी चावल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के हेंडीक्राफ्ट के आइटम की भी जमकर खरीदारी की। इस दौरान यहाँ आने वाले लोगो ने खरीदारी करने के बाद, भवन की कैंटीन में लजीज व्यंजनों के स्वाद का भी मजा लिया।
छत्तीसगढ़ के चावल की डिमांड दिल्ली के अलावा गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा से भी काफी मात्रा में आयी है। लोग इस चावल को पकाने के बाद इसकी एडवांस बुकिंग कर रहे है। एम्बेसी, नेवी, एयरफोर्स, आर्मी और खेल जगत से जुड़े लोगों ने भी छत्तीसगढ़ के चावल और हस्तशिल्प-हथकरघा के उत्पादों में काफी दिलचस्पी दिखाई है। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की छात्रा रही नविता ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ के एरोमेटिक चावल पर एक बुक लिखना चाहती है।
इस मेले में निर्धारित दिन में यहाँ आकर मनपसंद छत्तीसगढ़ के एरोमेटिक चावल खरीद सकते है। ये चावल ऑर्गैनिक के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी है। इस मेले में फ्रेश देसी छत्तीसगढ़ी स्नैक्स और हस्तशिल्प और हथकरघा के विभिन्न आइटम आम लोगों के लिए बिक्री हेतु उपलब्ध है।

 
 
जगदलपुर। जगदलपुर में एक घर से सांप के 27 बच्चे एक साथ मिलने पर से इलाके में दहशत का माहौल है, ग्रामीणों ने  इन्हें डिब्बों में बंद कर रखा है. मामले की जानकारी वन विभाग की टीम को दी गई ।
मामला जगदलपुर शहर से 8 किलोमीटर दूर आड़ावाल वालों में एक शख्स अपने घर निर्माण के लिए तोड़-फोड़ करवा रहा था. उसी दौरान बड़ी संख्या में डेढ़ से दो फीट के सांप नजर आए. देखते ही देखते एक दो नहीं बल्कि दर्जनों सांप बाहर निकलने लगे. तोड़फोड़ में लगे मजदूर सांपों को देखते ही वहां से भागखड़े हुए फिर किसी ने उन सांपों को एक-एक करके पकड़ा और उन्हें प्लास्टिक के एक जार में बंद कर दिया. हालांकि माना जा रहा है कि यह सांपों के बच्चे हैं और यहां से अभी और भी बड़े सांप निकल सकते हैं. मोहल्ले वालों ने इसकी जानकारी वन विभाग को भी दे दी है ।
फिलहाल इतनी बड़ी तादाद में सांपों के निकलने से कौतूहल मचा हुआ है वहीं दहशत की वजह से लोग उस घर के आस-पास जाने से भी डर रहे हैं ।

 
रायगढ़। अवैध खनन रोकने पहुंचे सहायक कलेक्टर (ट्रेनी आईएएस अफसर) और उनकी टीम को मारने का प्रयास करने वाले खनन माफिया अमृत पटेल को पुलिस ने ओडिशा से गिरफ्तार किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोपी को ओडिशा से पकड़ा। वारदात के बाद करीब एक माह से आरोपी अमृत अलग-अलग राज्यों में छिपता फिर रहा था। सारंगढ़ क्षेत्र में अवैध खनन होता देख मौके पर पहुंचे आईएएस अफसर को जेसीबी से कुचलने का प्रयास किया था। शहर के कोतरा रोड में गजानंदपुरम का रहने वाला अमृत पटेल कई सालों से सारंगढ़ टिमरलगा में पत्थरों की अवैध खदान चलाता था। सारंगढ़ के टिमरलगा, गुड़ेली इलाके में अवैध खनन की शिकायतों के बाद 11 अप्रैल की रात सहायक कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी माइनिंग की टीम के साथ जांच और कार्रवाई के लिए पहुंचे थे। दूर से खदान में काम होता देख चतुर्वेदी टीम के साथ वहां पहुंचे। यहां अमृत पटेल जेसीबी और अन्य वाहनों के साथ पत्थर की खुदाई और परिवहन में लगा था। अमृत ने सहायक कलेक्टर चतुर्वेदी और डिप्टी डायरेक्टर माइनिंग एसएस नाग को देखा तो भड़क गया। वह गालियां देता हुआ जेसीबी से दोनों को कुचलने का प्रयास किया।
अफसर वहां से हट गए और बड़ी मुश्किल से जान बचा पाए। हमले में डिप्टी डायरेक्टर नाग को चोट भी लगी। अफसरों ने पुलिस को बुलाया तब तक अमृत वहां से भाग निकला। आरोपी की सरगर्मी से तलाश की जा रही थी। पुलिस ने आरोपी अमृत पटेल और उसके साथी कन्हैया पटेल को गुरुवार को कनकतुरा-रेंगालपाली में पकडऩे की बात कही।
शाम को प्रेस कांफ्रेंस करके मीडिया को आरोपी के गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी अमृत के हर लोकेशन की जानकारी थी लेकिन वह घेराबंदी करने से पहले ही वहां से भाग जाता था। उस पर खनिज अधिनियम के तहत पहले भी कई बार मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि खनन माफिया अमृत का करीब 10 सालों से क्षेत्र में आतंक था।
पांच राज्यों के अलावा नेपाल में छिपा
रायगढ़ से पुरी में जाकर रुक गया। कुछ दिनों बाद भुवनेश्वर से बरगढ़। यहां से सड़क मार्ग से रायपुर। रायपुर से ट्रेन रूट से दिल्ली। दिल्ली से नेपाल। नेपाल के अलग-अलग गांवों में घूमने के बाद यहां से गोरखपुर। गोरखपुर से प्रयागराज। प्रयागराज से बिलासपुर। यहां से दोबारा पुरी। पुरी से भुवनेश्वर से नासिक से शिरडी। शिरडी से दोबारा नासिक। नासिक से रायपुर। इसके बाद बिलासपुर से कोलकाता। कोलकाता से भुवनेश्वर और यहीं से टीम ने इसका पीछा करते हुए बरगढ़ के रास्ते रेंगालपाली के पास पकड़ा।
शातिर है लेकिन पहले सख्त कार्रवाई नहीं हुई
ऐसा नहीं है कि अमृत पटेल अब माफिया बना है। उसके हौसले कई सालों से बुलंद हैं। दो साल पहले भी उसने कार्रवाई करने गई माइनिंग की टीम को बंधक बना लिया था। अवैध खनन और परिवहन उसकी आदत बन चुकी है। कई बार कार्रवाई हुई लेकिन पुलिस या प्रशासन ने कभी सख्ती नहीं दिखाई इसलिए हौसले इतने बढ़े कि अफसर को कुचलने की कोशिश कर दी। आरोपी के विरुद्ध सारंगढ़ में पहले से कई मामले दर्ज हैं।

 
कोटा । मुस्लिम-समाज के त्योहारों में रमजान का महीना बहुत ही मुबारक और अफजल वाला महीना कहलाता है. रमजान-उल-मुबारक की मुकद्दस माह में मुस्लिम-समाज के लोग पूरे एक माह तक रोजा (उपवास) रखते हैं. 1 माह तक रोजा रखने के बाद उपहार के रूप में मुस्लिम-समुदाय को अल्लाह-ताला त्योहार के रूप में ईद-उल-फितर की खुशियां देता है, शाबान महीने की एक तारीख से शुरू हुए रमजान का मुबारक महीने का दूसरा असरा जुमा (शुक्रवार) से शुरू हो गया है. पहला असरा जहां रहमत का था, तो दूसरा असरा बरकत का है ।
रमजान का महीना गर्मी के दिनों में शुरू हुआ 42 से 45 डिग्री तापमान होने के बावजूद 14 घंटा बिना खाए पिए बिना पानी के रहना बहुत मुश्किल है, बावजूद उसके मुस्लिम-समुदाय के लोग रोजा रख रहे हैं, सूरज की तेज गर्मी से भी मुस्लिम-समुदाय के लोगों का जज्बा कम नहीं हो रहा है, सूरज उगने से पहले से लेकर सूरज डूबने तक भूखा-प्यासा रहना काफी मुश्किल भरा होता है, वह भी इस भीषण गर्मी में इसके बावजूद भी मुस्लिम-समाज के मुस्लिम भाइयों द्वारा पूरे एहतियात और पूरे एहतराम के साथ इबादत में लगे हुए हैं ।
मस्जिदे-ताहा के पेश इमाम हाफिज गुलजार ने बताया कि शाबान के महीने में शुरू हुए रमजान के पाक रोजे मुसलमानों के लिए बेहद ही खास होते हैं. रमजान के महीने में पूरे एक माह तक रोजा रखना पड़ता है, इस दौरान तीन असरा पड़ता है. इन तीनों असरों में पहला असरा रहमत, दूसरा बरकत और तीसरे असरे में मगफिरत होती है. इस दौरान अल्लाह-ताला अपने नेक बंदों पर रहमत बरसाता है, उनकी दुआएं मकबूल फरमाता है, गलत बातों से बुराइयों से दूर फरमाता है ।
उन्होंने बताया कि दिन भर रोजा रखने और पांचों वक्त की नमाज पढ़ने के बाद रमजान में तरावीह की विशेष नमाज अदा की जाती है, जिसके लिए बाहर से हाफिज व कारी हाफिज-ए-कुरान मस्जिदों में इस विशेष तराबीह की नमाज़ पढ़ाते हैं. मस्जिद-ए ताहा कोटा में हाफिज-ए-कुरान बिलासपुर फैजुर-रज़ा मदरसे से मोहम्मद सादिक साहब विशेष नमाज-तरावीह को पढ़ा रहे हैं. तरावीह की नमाज के लिए आसपास गांव से नवागांव, बिल्लीबंद, बरर, नवापारा, छेरकाबांधा, लखोदना सहित अन्य गांव से भी मुस्लिम-धर्मावलंबी के लोग आते हैं ।
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