जांजगीर। जांजगीर-चांपा के सक्ती उपजेल में बन्दी हरिहर दास महंत की 22 मई को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मौत ने जेल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना से एक बूढ़ी मां का इकलौता सहारा इस दुनिया से दूर हो गया है।
बता दें कि 20 मई को सक्ती का रहने वाला हरिहर दास महंत को शराब के नशे में विवाद पर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। दो दिन बाद 22 मई को उसकी मौत की खबर जेल से बाहर आई। इस मौत से जेल प्रशासन के साथ डॉक्टर की भी भूमिका संदेह के दायरे में है। जेल में दाखिल करने से पहले डॉक्टर के स्वास्थ्य परीक्षण में हरिहर को स्वस्थ बताया गया था। बताया जा रहा है कि 22 मई को खून की उल्टी करने पर हरिहर को गंभीर स्थिति में सक्ती के समुदायिक स्वास्थ केंद्र लाया गया था, लेकिन शाम को चिकित्सको ने हरिहर को पूर्णता स्वस्थ बताते हुए उसे डिस्चार्ज कर दिया, और रात को जेल में हरिहर की मौत हो गई।
कहीं प्रताड़ना को तो नहीं हुआ शिकार
ये सारी बाते कहीं न कहीं जिम्मेदारों पर सवाल खड़ा कर रही है। कहीं गिरफ्तारी के समय हरिहर के साथ पुलिस वालों ने मारपीट तो नहीं की थी, या जेल में कहीं जेल प्रशासन की प्रताड़ना ने तो हरियर को मौत की नींद नहीं सुला दिया। इन तमाम सवालों के बाद डॉक्टरों की भूमिका भी संदिग्ध है, क्योंकी गिरफ्तारी से पहले बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है, जिसमे डॉक्टरों ने उसे स्वस्थ बताया है, मगर दो दिन में ऐसा क्या हुआ कि हरिहर की मौत हो गई।
छिन गया बुढापे का सहारा
बेटे की मौत की खबर सुनते ही उसकी बूढ़ी मां के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि इस बुढ़ापे में उसका इकलौता सहारा उससे हमेशा के लिए दूर हो चुका था। आज भी हरिहर की बेसहारा मां को उसके बेटे की मौत का विश्वास नहीं हो पा रहा है। उसका कहना है कि मेरा बेटा शराब जरूर पिता था मगर पूरी तरह से स्वस्थ था उसकी इस प्रकार मौत नहीं हो सकती, वहीं इस मामले में सक्ती अस्पताल के डॉक्टर इसे प्राकृतिक मौत बता रहे हैं। इकलौते बेटे की मौत के बाद बेसहारा हुई हरिहर की मां ने अब अधिकारियो से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं इस घटना के बाद अब कुछ संगठनों ने भी हरिहर को न्याय दिलाने का बीड़ा उठा लिया है।