Wednesday, 19 August 2026

देवभोग.।  अवैध धान परिवहन का मामला सामने आया है. एसडीएम ने 2 पिकअप वाहन समेत 100 बोरी धान जब्त कर लिया है. एसडीएम ने दोनों वाहन थाने के सुपुर्द कर दिया है. एसडीएम ने ओडिशा से लगे सीमाक्षेत्र में ये कार्रवाई की है. आरोपियों से मामले में विस्तृत पूछताछ की जा रही है.
 

 
रायपुर । राज्यपाल अनुसुईया उइके से राजभवन में तीन वर्षीय बालिका कुमारी शन्जन थम्मा ने मुलाकात की। उसने राज्यपाल को राष्ट्रगान सुनाया। राज्यपाल ने उसे बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनकी माता मानसी थम्मा ने बताया कि वह दोनों हाथों से लिख सकती है और विभिन्न राज्यों की राजधानी के नाम भी कंठस्थ है। उसका नाम इंडियन बुक ऑफ रिकार्ड और वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ इंडिया में दर्ज है। उसे पुरस्कृत भी किया गया है।
 

 कभी आपने बचपन में अपनी आंखों में एक छोटा सा स्पॉट नोटिस किया या फिर आप यूं ही अपनी आंखों का चेकअप करवाने गए और चेकअप के दौरान आपको पता चला हो कि आपको आई फ्रेकल है। आंखों में झाई होना सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में बेहद आम बात है और इससे आपकी आंखों को किसी तरह की हानि नहीं होती। हालांकि बहुत ही कम मामलों में यह एक प्रकार के कैंसर में बदल सकते हैं जिसे मेलेनोमा कहा जाता है। इसलिए चाहे आई फ्रेकल्स पुराने हों या नए, उनकी जांच जरूर करवानी चाहिए। तो चलिए आज हम आपको आई फ्रेकल्स के बारे में विस्तार से बताते हैं
आई फ्रेकल्स आंखों में मौजूद स्पाॅट को कहा जाता है। कई बार यह आपको नजर आ भी सकता है और नहीं भी। यह आपकी आई बाॅल से लेकर बाहरी हिस्से पर कहीं भी हो सकता है। आमतौर पर आई फ्रैकल्स दो प्रकार का होता है- इनमें से एक को तकनीकी रूप से नेवस कहा जाता है। नेवस का अर्थ ही होता है तिल। इन्हें स्पॉट करना काफी आसान है। वहीं अन्य आई फ्रैकल्स आपकी आंखों के पीछे छिपे होते हैं और इसे एक आई स्पेशलिस्ट ही देख पाता है और इसलिए इन फ्रैकल्स के बारे में आंखों की जांच करवाने पर ही पता चलता है। चूंकि यह आंखों के अलग-अलग हिस्से पर होते हैं तो उसी के अनुरूप इनके नाम भी हैं-
आई फ्रैकल्स कई कारणों से हो सकता है। हो सकता है कि जन्म से ही आपको आई फ्रैकल हों या फिर जन्म के बाद भी जैसे-जैसे आप बढ़ते हैं, यह भी विकसित हो सकता है। स्किन पर होने वाली झाईयों की ही तरह आई फ्रैकल्स भी मेलानोसाइट्स के कारण होते हैं। इसके अतिरिक्त सूरज की किरणें भी नेवस को बढ़ा सकती हैं। आईरिस नेवस भी धूप के कारण बढ़ सकते हैं। 2017 में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने अधिक समय धूप में बिताया, उनमें आईरिस फ्रैक्ल्स अधिक थे।
कंजंक्टिवल नेवी अक्सर आखों के सफेद भाग पर साफतौर पर दिखाई देते हैं। इसका अन्य कोई लक्षण नजर नहीं आता। यह स्थिर बने रहते हैं, लेकिन समय के साथ बढ़ती उम्र में या गर्भावस्था के दौरान इनका रंग बदल सकता है।
आईरिस नेवी आमतौर पर आंखों को चेक करते समय ही सामने आते हैं। वे आमतौर पर नीली आंखों वाले लोगों में होते हैं और इन व्यक्तियों में अधिक आसानी से देखे जाते हैं।कोरोइडल नेवी होने पर कोई लक्षण नजर नहीं आते, हालांकि यह तरल पदार्थ का रिसाव कर सकते हैं।
 

आमतौर पर हम सभी सर्दियों में गरम खाने की तलाश करते हैं, जो आपकी सेहत के लिए अच्‍छा हो। ऐसे खाने में से एक है बेसन कढ़ी, जो आपको सर्दियों में गर्माहट देने के साथ आपको स्‍वस्‍थ रखने में मदद करती है। वैसे बेसन की कढ़ी कई उत्तर भारतीयों के घरों में एक शुभ और पौष्टिक भोजन माना जाता है। इतना ही नहीं, बेसन की कढ़ी को इसके अलग स्वाद और सुगंध के लिए बहुत से लोग पसंद करते हैं।
बेसन की कढ़ी आपके लिए कई पौष्टिक तत्‍वों से भी भरपूर है, इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और फास्फोरस और कई विटामिन्‍स व खनिज भरपूर हैं। बेसन की कढ़ी आपको शारीरिक कार्यों के साथ आपके संपूर्ण विकास में सुधार करने में मदद करता है। तो आइए अगर आप भी कढ़ी खाना बेहद पसंद करते हैं, तो यहां आपके इसके कुछ फायदे बताते हैं
बेसन कढ़ी ऐनेमिक रोगियों यानि जिनमें खून की कमी होती है, उनके लिए बेहतरीन खाना है। क्‍योंकि बेसन की कढ़ी आयरन और प्रोटीन से भरपूर है, जो कि आपके हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए एक आदर्श कॉम्बो है। तो सर्दियों में आप बेसन की गर्मागर्म कढ़ी का आंनद ले सकते हैं।
बेसन में एंटी ऑक्‍सीडेंट्स और एंटी इंफ्लामेटरी गुण भरपूर मात्रा में होते हैं। यह आपके चेहरे की समस्‍याओं को दूर करने में मददगार होते हैं। इससे आपके चेहरे के मुंहासे, काले धब्‍बे और साथ ही बालों की समस्‍या कम करने में मदद मिलती है।  यहां आप वीडियों की मदद से बेसन के  कुछ फेस पैक बनाना सीख सकते हैं।
बेसन की कढ़ी गर्भवती महिलाओं के लिए एक पूर्ण आहार हो सकता है। क्‍योंकि इसमें महिला के लिए जरूरी पोषक तत्‍व जैसे फोलेट, विटामिन बी 6 और आयरन की भरपूर मात्रा होती है। जिसकी वजह से यह बच्चे के विकास में मदद करता है और महिला के शरीर को पोषण देकर गर्भपात या अन्‍स प्रसव संबंधी समस्‍याओं की संभावना को कम करता है।
बेसन कढ़ी का सेवन सर्दियों में करना आपके लिए बेहद स्‍वास्‍थ्‍यप्रद है। यह आपके पाचन को भी बेहतर रखने में मददगार होती है। क्‍योंकि इसमें अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो आंत के लिए अच्‍छे और उसे स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह गट फ्लोरा को बनाए रखने में मदद करता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में सुधार करता है। जिसकी वजह से पाचन में सुधार करने में मदद मिलती है।
बेसन कढ़ी में मैग्नीशियम और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स होता है, जो आपके ब्‍लड प्रेशर और ब्‍लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद कर सकते हैं। मैग्नीशियम आपकी मांसपेशियों को आराम देता है और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। वहीं इसमें मौजूद फास्फोरस लिपिड तंत्र को विनियमित करने में मदद करता है। इसके अलावा, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स डायबिटीज रोगियों के आर्दश भोजन माना जाता है।
अक्‍सर जो लोग अपने वजन घटाने को लेकर प्रयासरत रहते हैं, वह कुछ भी खाने से पहले सोचते हैं। ऐसे में अगर आप भी बेट लॉस मिशन पर हैं, तो कढ़ी को अपना इस जर्नी का दोस्‍त बनाएं। बेसन कढ़ी में मौजूद चने का आटा  मुख्य सामग्री के रूप में शामिल होता है और बेसन में पूरे गेहूं के आटे की तुलना में अधिक अच्छा फैट और प्रोटीन होता है। यह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट में समृद्ध है साथ ही इसमें फोलेट और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स है। जिसकी वजह से यह वजन कम करने में मदद करता है और आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ाने में मदद करता है। इतना ही नहीं यह आपके दिल के लिए भी अच्छा है।
 
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