
पिथौरा, महासमुंद । फर्जी ऋण पुस्तिका बनाकर विभिन्न बैंकों से फर्जी ढंग से केसीसी लोन स्वीकृत कराने का मामला उजागर होने के बाद अनेक चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। फर्जी ऋण पुस्तिका से जहां समर्थन मूल्य पर धान बेचते रहे, वहीं करोड़ों रुपये के लिए गए कृषि ऋण माफी का लाभ भी मिल गया। इस गोरखधंधे ने क्षेत्र के करीब दर्जनभर बैंकों को सकते में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि सात साल में आरोपितों ने चार सौ से भी अधिक फर्जी ऋण पुस्तिका बनाई है। इस लिहाज से करोड़ों रुपये कृषि ऋण लिया गया था, जो कर्जमाफी योजना का लाभ भी मिल चुका है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने चुनावी वायदों के तहत किए गए कर्ज माफी में इन फर्जीवाड़ों के भी करोड़ों रुपए माफ हो गए हैं। इतना ही नहीं इन फर्जी पट्टों से लगातार समर्थन मूल्य पर धान भी बिकता रहा और बोनस की राशि भी मिलती रही। पुलिस इस दिशा में भी पड़ताल करे तो करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा।
दीपावली के ठीक एक दिन पहले पिथौरा पुलिस ने क्षेत्र में विगत सात वर्षों से फर्जी ऋण पुस्तिका से विभिन्न बैंकों एवं सोसाइटियों से केसीसी लोन हासिल कर धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले गिरोह के सात लोगों को धर दबोचा और मामले का पर्दाफाश किया है।
ज्ञात हो कि पिथौरा क्षेत्र में लंबे समय से फर्जी ऋण पुस्तिका का मामला सुर्खियों में रहा है। पिथौरा तहसील कार्यालय से करीब आठ सौ ऋण पुस्तिका आज भी नदारद है। इस मामले को लेकर अनेक शिकायतें भी हुई है।
फर्जी पट्टों से समर्थन मूल्य पर बिकता रहा धान
छत्तीसगढ़ शासन से समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे धान में इन फर्जी पट्टों से भी भारी मात्रा में धान बिकता रहा है। पिथौरा क्षेत्र के सभी सोसायटियों में यह खेल लगातार होते रहा है। सर्वाधिक गड़बड़ी का क्षेत्र बेलडीह, बुंदेली और बरेकेल सोसाइटी को बताया जा रहा है, जहां पर फर्जी ऋण पुस्तिका से समर्थन मूल्य पर धान बिक्री किए जाने का खेल किया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पुलिस जांच के दौरान बेलडीह निवासी आरोपित सुभाष चक्रधारी के घर से सोसाइटी का सील मोहर भी पुलिस को बरामद हुआ है। इसी तरह अरंड निवासी आरोपित दीनबंधु पटेल का गहरा संबंध सुभाष चक्रधारी के साथ होना बताया जा रहा है। दोनों की मिलीभगत से ही क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के नाम पर फर्जी ऋण पुस्तिका बनाकर यह खेल किया जाता रहा।
बैंकों एवं सोसाइटियों से खंगाले जा रहे रिकार्ड
पिथौरा पुलिस क्षेत्र के उन सभी बैंकों एवं सोसाइटियों से जानकारी उपलब्ध कराने पत्र लिखा है, जहां से फर्जीवाड़े होने के संदेह हैं। अथवा पकड़े गए आरोपितों के बयान में नाम आए हैं। पिथौरा पुलिस को उक्त सभी बैंकों एवं सोसायटियों से रिकार्ड खंगालने में लगी हुई है। हालांकि इसमें अभी साक्ष्य एकत्रित करने में काफी वक्त लगेगा।
जंगल एवं राजस्व विभाग के शासकीय जमीन के भी पट्टे
फर्जीवाड़ा गिरोह में शामिल लोगों ने कुछ राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर जंगल एवं राजस्व विभाग के शासकीय जमीन जिसमें बड़े झाड़ के जंगल तक शामिल हैं, का भी फर्जी पट्टा बनाकर एवं राजस्व खसरा नंबर का उपयोग कर फर्जीवाड़ा को अंजाम दिया गया है।
पत्नी सुमित्रा के नाम पर भी बनाया ऋण पुस्तिका
फर्जीवाड़ा का मास्टर माइंड उत्तम मजूमदार अपनी पत्नी सुमित्रा मजूमदार के नाम पर भी ग्राम गिरना में करीब 20 एकड़ जमीन का फर्जी पट्टा बना लिया है तथा पिथौरा सहकारी संस्था से करीब डेढ़ लाख रुपये का लोन ले लिया था। लंबे समय तक लोन की अदायगी नहीं की गई थी जो अब ऋण माफी के चलते माफ भी हो गया है। अर्थात फर्जीवाड़ा का सैकड़ों किसानों का लोन भी माफ हो चुका है। इस मामले में सहकारिता विभाग को विस्तृत जांच की आवश्यकता है।







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