Friday, 14 August 2026

 
सुकमा । उद्योग आबकारी मंत्री कवासी लखमा अपने विधानसभा क्षेत्र कोंटा में तूफानी सभाओं का लगातार दौरा कर रहे हैं. मंगलवार को यहां डुब्बाटोटा गांव में हाई स्कूल भवन का लोकार्पण करने पहुंचे मंत्री लखमा ने सरकार के सात महीनों में किये गए विकास कार्यो के बारे में जनता को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बन्द पड़े स्कूलों को फिर से शुरू किया जा रहा है. जिसमें जगरगुंडा और भेज्जी शामिल है ।
मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि गांव-गांव मे पुन: स्कूलों के संचालन से अब आदिवासियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा की व्यवस्था होगी. हमारा प्रयास है कि हर बच्चे को शिक्षा मिले. जिससे गांव का हर बच्चा शिक्षित हो ।
बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में और मंत्री कवासी लखमा की विशेष पहल से वर्ष 2006 से बंद हुए जगरगुंडा और भेज्जी जैसे 85 स्कूलों को पुन: उसी गांव मे प्रारंभ कराया गया है ।
शिक्षित बेरोज़गारों को मंत्री कवासी लखमा के प्रयासों से गांव में ही शिक्षादूत के रूप में नौकरी दी गई है. जिन्हें 11 हज़ार रूपये मासिक तनख़्वाह भी दिया जा रहा है. आदिवासी भाई-बहनों को अलग अलग शिविरों के माध्यम से मंत्री कवासी लखमा के हाथों 15 सौ लोगों को अब तक जाति प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया है ।
जल जंगल ज़मीन की रक्षा करने वाले भाईयों को वनों का अधिकार देते हुए वन भूमि का पट्टा वितरित किया गया है. यहां उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार हर वर्ग का पूरा ख्याल रख रही है. नगरीय क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को घर की ज़मीन के लिए पट्टा दिया जाएगा ।

 
 
 छत्तीसगढ़ में अल्पवर्षा के कारण अकाल की स्थिति बनती नजर आ रही है. आम लोगों से लेकर किसान भी बारिश नहीं होने से काफी परेशान हैं. तो वहीं राज्य की कांग्रेस सरकार को विपक्षी दल ने इस मुद्दे पर घेरना भी शुरू कर दिया है. मालूम हो कि प्रदेश के 12 जिले और 73 तहसीलों में अल्पवर्षा के कारण सूखे के हालात बनते नजर आ रहे है।
छत्तीसगढ़ सहित देशभर में अल्पवर्षा की स्थिति, गिरता भू-जल स्तर और पानी की बर्बादी भीषण जल संकट की ओर ईशारा कर रही है. मगर तमाम ईशारों के बावजूद धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. आलम ये है कि राज्य सरकार केवल कागजों में चुस्त दिखाई दे रही है, जबकि धरातल पर हकीकत ये है कि छत्तीसगढ़ में 21 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की आवश्कता तो है, लेकिन महज 12 लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई हो पाती है. मौजूदा हालात सूखे को लेकर ये है कि राज्य की 73 तहसीलों में सूखे के हालात बन गए है. अब अल्पवर्षा को लेकर किसान से लेकर राजनीतिक दलों ने भी अपनी चिंता दिखानी शुरु कर दी है।
किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से खेत किसानी का कार्य करने में परेशानी हो रही है. अब बारिश का इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं है. वहीं इस मामले में जेसीसी जे सुप्रीमो अजीत जोगी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सबसे बुरा अकाल मंडरा रहा है. उत्तरी हिस्से में बारिश नहीं हो रहा है. इस वजह से धान सूख रहा है. अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो सूबे के 2/3 इलाके में सूखे की स्थिति बन सकती है. तो वहीं बीजेपी प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अकाल की स्थिति बनी हुई है. किसान परेशान हैं. जिन जिलों में सूखे की आशंका है वहां के लिए सरकार ने कोई ठोस तैयारी और प्लानिंग नहीं की है।
कृषि वैज्ञानिक ने कही ये बात
प्रदेश में सूखे के हालात को लेकर कृषि वैज्ञानिक ने भी अपनी चिंता जताई है. कृषि वैज्ञानिक संकेत ठाकुर मानते हैं कि अभी राज्य में सूखे को लेकर गंभीर हालात है. राज्य सरकार को किसानों के हित में आपातकालीन कदम उठाने की तैयारी करनी चाहिए. तो वहीं सूबे के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे मानते हैं कि आने वाली सभी तकलीफों से निपटने की सारी तैयारी सरकार ने कर ली है।
 

 
 कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक ने आज जिला कलेक्टोरेट के प्रांगण में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार हेतु प्रचार रथ को हरी झण्डी दिखाकर विभिन्न विकासखण्डों के लिए रवाना किया । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसल हेतु अधिसूचित फसल यथा सिंचित, असिंचित धान, मक्का, अरहर, मूंग, मूंगफली और उड़द फसल का बीमा कराया जा रहा है। इन फसलों का प्राकृतिक आपदाआं कीटों और बीमारियों के कारण नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। बीमा एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा की जायेगी। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से इन फसलों का बीमा कराने का आग्रह किया है। इस अवसर पर कृषि विभाग के उप संचालक एम आर तिग्गा भी उपस्थित थे।

 तखतपुर । श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किये गए चंद्रयान- 2 मिशन से भारत विश्व के उन गिने चुने देशों में शुमार होने जा रहा है जिन्होंने चांद पर अपना यान उतारा है. भारत से पहले रुस, अमेरिका और चीन ही ऐसा कर पाए हैं. चंद्रयान 2 की जिस टीम ने इतिहास रचा है उसमें छत्तीसगढ़ के दो युवा भी शामिल हैं जिसमें राजधानी रायपुर के आर आदित्य और तखतपुर निवासी व साइंटिफिक इंजीनियर विकास श्रीवास भी शामिल है । 
विकास श्रीवास
इसमें विकास श्रीवास ने चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है. इस मिशन में विकास के शामिल होने की वजह से परिजनों की खुशियों का ठिकाना नहीं था. चंद्रयान 2 की लांचिंग के वक्त परिजन टीवी के सामने डटे रहे. विकास के परिजनों ने बताया कि वह 2007 से जीएचएलवीएमके व्हीकल के काम में जुटा हुआ था । 
विकास की प्रारंभिक शिक्षा तखतपुर के एक निजी स्कूल में हुई. उसके बाद उसकी पूरी शिक्षा बिलासपुर में ही हुई. कोनी स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उसने इसरो ज्वाइन कर लिया. उनके पिता दिनेश श्रीवास, माता भावना श्रीवास, भाई विवेक, विनित के साथ परिवार के सभी सदस्य गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं । 
विकास के पिता दिनेश श्रीवास का कहना है कि बेटा ऐसा काम करे तो पिता का जीवन सफल हो जाता है, ये गर्व का पल है. उन्होंने कहा कि मिशन पूरा होने के बाद बेटे से बात हुई. उसने पहले भी मिशन की कामयाबी के लिए प्रार्थना करने की बात कही थी. उसने कहा था हमारी तैयारी पूरी है, अब कोई तकनीकी कारण आड़े नहीं आएगा. हम सब पूरे जोश में हैं, विश्वास में हैं. देश की नजर इसरो पर है, हम जरूर कामयाब होंगे. चंद्रयान 2 की लांचिंग के बाद परिजनों के पास फोन कॉल आने शुरू हो गए. बधाई देने वालों का देर रात तक तांता लगा रहा । 
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